Saturday, April 6, 2019

Safar-Notebook lyrics 2019 | Mohit chauhan | Full lyrics in hindi and english

Safar-Notebook lyrics 2019 | Mohit chauhan | Full lyrics in hindi and english



Song: Safar
Movie – Notebook
Singers – Mohit Chauhan
Musicians – Vishal Mishra
Lyricists – Kaushal Kishore



Safar-Notebook lyrics 2019 | Mohit chauhan | Full lyrics in english



Oh bandeya dhoondhe hai kya
Raahein teri hai ghar tera
Chalna wahan, jaana wahan
Khudtak kahin pahunche jahan

Kadam utha aur sath mein ho le
Shehar shehar yeh tujhse dekho bole
Tukar tukar yoon apne naina khole
Zindagi pee le zara

Behti hawaoan ke jaise hain iraade
Udte parindon se seekhi hain jo baatein
Anjani raahon pe koyi main chala

Main safar main hoon
Khoya nahi x (4)

Thoda aage bhadhein maine jaana
Yeh sach hai to kya hai
Uljhe uljhe sab sawaal
Zindhgi hai kya, main kaun hoon
Maine yeh jaana
Mujhe mil hi gaye sab jawab



Dekho na hawa kaanon mein mere kehti kya
Boli wekh Fareeda mitti khuli
Mitti utte Fareeda mitti dulli
Chaar dina da jee le mela duniya
Phir jaane hona kya

Behti hawaoan ke jaise hain iraade
Udte parindon se seekhi hain jo baatein
Anjani raahon pe koyi main chala

Main safar main hoon
Khoya nahi x (2)

Yeh kaisa safar hai jo yoon duba raha
Ja paaun kahin main ya laut ke aa raha
Woh chehre woh aakhein, woh yaadein
Purani mujhe poochhti
Yeh nadiya ka paani bhi behta hai kehta yehi

Main safar main hoon
Khoya nahi x (3)




Safar-Notebook lyrics 2019 | Mohit chauhan | Full lyrics in hindi


ओ बन्देया
ढूंढे है क्या राहें तेरी है घर तेरा?
चलना वहाँ, जाना वहाँ
खुद तक कहीं पहुंचे जहां
"कदम उठा और साथ में हो ले"
शहर-शहर ये तुझसे देखो बोले
टुकुर-टुकुर यूँ अपने नैना खोले
ज़िन्दगी पी ले ज़रा
बहती हवाओं के जैसे हैं इरादे
उड़ते परिंदो से सीखी हैं जो बातें
अनजानी राहों पे कोई, मैं चला
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
थोड़ा आगे बढ़े
मैंने जाना ये सच है तो क्या है
उलझे-उलझे सब सवाल
ज़िन्दगी है ये क्या?
मैं कौन हूँ? मैंने ये जाना
मुझे मिल ही गए सब जवाब
देखो ना हवा कानों में मेरे कहती क्या
बोली, "ਵੇਖ ਫ਼ਰੀਦਾ ਮਿੱਟੀ ਖੁੱਲ੍ਹੀ"
"ਮਿੱਟੀ ਉੱਤੇ ਫ਼ਰੀਦਾ ਮਿੱਟੀ ਢੁੱਲੀ"
"चार ਦਿਨਾਂ ਦਾ जी ले मेला दुनिया"
"फिर जाने होना क्या?"
बहती हवाओं के जैसे हैं इरादे
उड़ते परिंदों से सीखी हैं जो बातें
अनजानी राहों पे कोई, मैं चला
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं, ओ
ये कैसा सफ़र है जो यूँ डूबा रहा?
जाता हूँ कहीं मैं या लौट के आ रहा
वो चेहरे, वो आँखें, वो यादें पुरानी मुझे पूछती
ये नदिया का पानी भी बहता है, कहता यही
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं
खोया नहीं
खोया नहीं
खोया, खोया, खोया, खोया नहीं
मैं सफ़र में हूँ खोया नहीं

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